जिग्नेश मेवाणी की जीत से क्यूँ है भाजपा परेशान?

December 26, 2017 by No Comments

गुजरात में यूँ तो भाजपा ने सरकार बना ली है लेकिन पार्टी नेताओं में इस जीत को लेकर वो ख़ुशी नहीं है जो होनी चाहिए. इसकी हालाँकि वजह भी है क्यूंकि ऐसा 22 सालों में पहली बार हुआ है कि भाजपा डबल डिजिट में आ गयी. इसके पहले उनकी 100 से अधिक ही सीटें आती रही हैं लेकिन भाजपा नेताओं को एक झटका और लगा है.

वाडगम से जिग्नेश मेवाणी की जीत भाजपा के क्षेत्रीय नेताओं को परेशान कर रही है.जिग्नेश जो कि निर्दलीय उमीदवार थे उन्हें हराने के लिए भाजपा ने पूरी ताक़त लगा दी थी. बड़े-बड़े नेताओं ने मेवाणी के ख़िलाफ़ प्रचार किया लेकिन दलित नेता को हराने में नाकामयाब रहे. मेवाणी की जीत इस मायने में भी अहम् है कि इससे प्रदेश की राजनीति में दलित समाज को नया विकल्प मिलेगा. मेवाणी की जीत सेक्युलर ताक़तों की बड़ी जीत है.

जिग्नेश लगातार आरएसएस को “फ़ासीवादी” कहते रहे हैं और इसको लेकर अलग-अलग जगह सभाएँ-सेमीनार करते रहे हैं. वाडगम में उनकी जीत से गुजरात ही नहीं देश के दूसरे हिस्सों में भी प्रभाव पड़ेगा. मेवाणी ने हाल ही में ये भी कहा है कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले चुनाव में पाटीदार अनामत आन्दोलन समिति के अध्यक्ष हार्दिक पटेल के सामने चुनाव लड़ जाएँ तो मोदी हार जायेंगे. मेवाणी के इस बयान के कई मतलब निकाले जा रहे हैं. एक तो बात ये है कि हार्दिक प्रदेश की राजनीति में इतने ताक़तवर हो गए हैं कि अब उनके लिए ऐसी बात कही जा रही है तो दूसरी बात ये भी है कि अब जिग्नेश मेवाणी और अल्पेश ठाकुर जैसे नेता विधानसभा में दाख़िल हो चुके हैं जो भाजपा को सीधी टक्कर देंगे.

इस बीच मेवाणी ने एक ट्वीट कर कहा है कि वडगाम की जीत हर सेक्युलर और ग़रीब समर्थक की जीत है.

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