इस मामले से हुआ साबित, सऊदी अरब से डरता है अमरीका

October 17, 2018 by No Comments

सऊदी अरब एक ऐसा देश है जिसे अरब देशों में सबसे ताक़तवर माना जाता है. सऊदी अरब की सरकार पर संयुक्त राज्य अमरीका का प्रभाव देखा जा सकता है लेकिन दूसरी ओर सऊदी अरब भी अमरीकी की नीति को प्रभावित करता है.

पिछले दिनों दा वाशिंगटन पोस्ट के वरिष्ट पत्रकार जमाल खाशोग्गी के तुर्की स्थिति सऊदी कांसुलेट से लापता हो जाने के बाद से ही सऊदी अरब और अमरीका के रिश्तों में कुछ खटास देखी जा सकती है. परन्तु अन्तराष्ट्रीय संबंधों के जानकार मानते हैं कि अमरीकी सरकार भले ही ये दिखा रही हो कि वो सऊदी अरब से नाराज़ है लेकिन वो सऊदी अरब के ख़िलाफ़ कोई क़दम उठाने की स्थिति में नहीं है.

अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और सऊदी क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान के बीच अच्छी दोस्ती मानी जाती है. दोनों ही नेता इस बात को बार-बार कह चुके हैं, दूसरी ओर सऊदी अरब ने जबसे विज़न २०३० की घोषणा की है तभी से ही सऊदी अरब में व्यापार के नए रास्ते खुले हैं. अमरीका नहीं चाहेगा कि सऊदी अरब के निर्माण से उसे कोई फ़ायदा न हो. जमाल खाशोग्गी के ग़ायब होने के मामले को भले ही विश्व मीडिया ने बढ़-चढ़ कर उठाया हो लेकिन सऊदी अरब इससे ज़रा भी विचलित नज़र नहीं आ रहा.

अमरीकी राष्ट्रपति ने भले ही मीडिया के सामने कहा हो कि अगर इसमें सऊदी अरब का हाथ होगा तो वो कड़ी कार्यवाही करेंगे लेकिन सऊदी अरब ने जिस तरह से उनके बयान पर प्रतिक्रिया दी है उससे अमरीकी नेताओं में डर सा हो गया है.देखा जाए तो सऊदी अरब से फ़्रांस और ब्रिटेन भी इस समय सम्बन्ध बिगड़ना नहीं चाहते, उसकी वजह यही है कि विज़न २०३० से इन सभी देशों को फ़ायदा होने की उम्मीद है.

जमाल खाशोग्गी के मामले पर तुर्की सऊदी अरब से ख़ासा नाराज़ है. इसको लेकर जहाँ तुर्की बार-बार कह रहा है कि सऊदी अरब जाँच में सहयोग नहीं कर रहा वहीं तुर्की की मीडिया बार-बार ये दावा कर रही है कि सऊदी अरब की सरकार के इशारे पर खाशोग्गी की हत्-या हो चुकी है. लम्बी बातचीत के बाद सऊदी अरब ने तुर्की की जाँच टीम को इस्तांबुल स्थित कांसुलेट में घुसने की अनुमति दी. आपको बता दें कि खाशोग्गी 2 अक्टूबर को सऊदी कांसुलेट में गए थे लेकिन उसके बाद वो बाहर नहीं निकले. तुर्की में सऊदी कांसुलेट के दफ़्तर में खाशोग्गी किसी निजी काम से गए थे लेकिन वहाँ से उनके वापिस निकलने का कोई सुबूत नहीं है.

सऊदी कांसुलेट के अधिकारी कह रहे हैं कि खाशोग्गी कांसुलेट में आये थे और चले गए थे लेकिन इस बात को लेकर वो सुबूत देने में नाकाम नज़र आ रहे हैं. CCTV फ़ुटेज में खाशोग्गी के कांसुलेट के अन्दर जाने का तो फ़ोटो है लेकिन बाहर आने का कोई भी सुबूत नहीं दिखा है. आपको बता दें कि जमाल खाशोग्गी वाशिंगटन पोस्ट के लिए भी काम करते हैं और उनका लेखन सऊदी क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान की आलोचना करने वाला रहा है. खाशोग्गी सऊदी अरब के नागरिक हैं, उनका निवास संयुक्त राज्य अमरीका में है.

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