मध्य प्रदेश में है 230 विधानसभा सीटें लेकिन मुस्लिम विधायक सिर्फ़ एक है…

November 7, 2018 by No Comments

भोपाल। देश के दो मुख्य राजनीतिक दल बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही सत्ता मे सबकी भागीदारी सुनिश्चित करने की बात करते हैं। जहाँ बीजेपी सबका साथ सबका विकास का नारा देती है. वहीं कांग्रेस किसी धर्म विशेष के दल के बजाय ख़ुद को राष्ट्रवादी पार्टी कहना पसंद करती है। लेकिन क्या वास्तव में स्थिति ऐसी ही है। बात अगर मध्यप्रदेश की करें तो यहाँ विधानसभा में 230 सीटें हैं। यहाँ 1998 से बीजेपी की सरकार है ।लेकिन यहाँ के विधायको में से मुस्लिम विधायकों की संख्या सुन के आप हैरान हो जाएंगे। यहाँ सिर्फ़ एक ही मुस्लिम विधायक है।यह विधायक हैं आरिफ़ अक़ील। वह 1998,2003,और 2013 मे चुनाव जीतकर विधानसभा सभा पहुंचे हैं।

वर्तमान मे वह कांग्रेस के सदस्य हैं इससे पहले वह निर्दलीय चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। 1998और 1990 मे मध्यप्रदेश विधानसभा मे मुस्लिम विधायकों की संख्या दो थी। 1993 से 1998 के बीच विधानसभा मे एक भी मुस्लिम विधायक नहीं था। उल्लेखनीय है उस समय प्रदेश मे कांग्रेस की सरकार थी और दिग्विजय सिंह राज्य के मुख्यमंत्री थे।मध्यप्रदेश विधानसभा मे मुसलमानों की अधिकतम संख्या 6 रही है।जो कि 1980 मे थी। उस समय मध्यप्रदेश का विभाजन नहीं हुआ था और विधायको की संख्या 320 थी।

दिलचस्प बात यह है कि यह मुस्लिम विधायक उन क्षेत्रों से जीतकर आए थे जो 2000 में राज्य के बंटवारे के बाद मध्यप्रदेश का ही हिस्सा रहा। यानी विभाजन से पूर्व के मध्यप्रदेश मे भी मुसलमानों का प्रतिनिधित्व संख्या की दृष्टि से कम हुआ है। हालांकि विधानसभा चुनावों से पहले मुस्लिमों को उचित संख्या में टिकट न दिए जाने की बात उठती रही है लेकिन दोनों ही दलों का मानना है चुनावों में उम्मीदवार के जीत पाने की क्षमता के आधार पर ही टिकट दिये जाते है। इस मुद्दे पर जानकारों का कहना हैं कि मध्यप्रदेश में भोपाल और कुछ अन्य सीटों को छोड़कर मुस्लिमों की संख्या बहुत ज़्यादा नहीं है। यही वजह है कि विधानसभा में उनका प्रतिनिधित्व भी कम है। लेकिन यहाँ एक सवाल ज़रूर उठता है कि क्या मुस्लिम उम्मीदवार को हिन्दू मतदाता वोट नहीं देंगे।

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