क्या मीम दूसरे राज्यों में मज़बूत हो सकेगी?

November 10, 2018 by No Comments

शाइर और लेखक जावेद अख़्तर ने एक बार असद उद्दीन ओवैसी पर तंज़ किया था कि उनकी पार्टी महज़ एक शहर तक सीमित है। पिछले कुछ सालों में ओवैसी की पार्टी आल इंडिया मजलिस ए इत्तिहादुल मुस्लिमीन ने जिस प्रकार बढ़त बनायी है, कई लोग हैरान हैं। ओवैसी की पार्टी ने कर्णाटक, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में अपना संगठन खड़ा कर लिया है। फिर भी सवाल ये उठता है कि क्या ओवैसी की पार्टी दूसरे राज्यों में कोई राजनीतिक दख़ल दे सकेगी। महाराष्ट्र के औरंगाबाद के लोकल इलेक्शन देखें तो ऐसा लगता है कि आल इंडिया मजलिस ए इत्तिहादुल मुस्लिमीन ने अब अच्छी बढ़त बना ली है। महाराष्ट्र में AIMIM के 2 विधायक हैं जबकि उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रों में ओवैसी की पार्टी मज़बूत हो गयी है।

पार्टी की परेशानी देखें तो यही है कि एक तो ये मुस्लिम पार्टी है और दूसरे धर्म के लोगों को ये जोड़ने में नाकाम रह जा रही है। दूसरी बात ये कि असद उद्दीन ओवैसी के छोटे भाई अकबरुद्दीन ओवैसी अक्सर अपने बयानों की वजह से विवादों में आ जाते हैं। कई जानकार कहते हैं कि असदउद्दीन ओवैसी लंबी रेस का घोड़ा हैं तो अकबर बस मुहल्ले में भाषण देकर ख़ुश हो जाते हैं।

ऐसा लगता है कि मीम को अपने तरीक़ों में बदलाव करना होगा। पार्टी सोशल मीडिया पर मुसलमानों की फ़ेवरिट तो बनी हुई है लेकिन विस्तार के लिए हर धर्म-जाति के वोटर्स चाहिएँ। ऐसा न होने पर ये बढ़त जाती रहेगी। एक और बात ये भी है कि भाजपा ने जिस प्रकार से ‘हिंदुत्व’ का मुद्दा उठाया है, उससे मीम को भी लाभ हुआ है। जानकार मानते हैं कि धार्मिक ध्रुवीकरण का लाभ इन दोनों पार्टियों को मिला है। परंतु मीम के लिए रास्ता अभी आसान नहीं है, 2019 के चुनाव के नतीजे ही बताएँगे कि मीम कितनी बढ़त क़ायम रख पायी

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