वो फल जिसे खाने से चालीस मर्दों के बराबर ता'कत मिलती है,नबी ए करीम (स.अ.व.) ने फ़रमाया

March 12, 2019 by No Comments

आज हम आपको एक ऐसे फल के बारे में बताने जा रहे हैं,जो अक्सर लोगों के लिए नया होगा।लेकिन यह एक बहुत ही मुफ़ीद फल है।यह फल बिलकुल हरे सेब की शक्ल और ज़ायक़ा में इस से मिलता जुलता होता है।इस फल का नाम बही है,इस में मुतअद्दिद तिब्बी और ग़िज़ाई खूबियां कूट कूट कर भरी हुई हैं।ये बहुत से बीमारी में एक अच्छे ख़ासे मुस्तनद मुआलिज का काम देती है।
यह सेब की शक्ल का फल है।ये फल दुनिया के अक्सर पहाड़ी इलाक़ों में बकसरत पाया जाता है।अरबी में इसे सफ़रजल।फ़ारसी में बही और अंग्रेज़ी में काउंस quince कहते हैं।इस फल के बारे में अल्लाह के रसूल सललल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया बही खाओ क्योंकि वो दिल के दौरे को ठीक कर के सीना से बोझ उतार देता है।

हज़रत अनस रज़ी अल्लाहु अनहु से रिवायत हैं,अल्लाह के रसूल सललल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया बही खाने से दिल पर से बोझ उतर जाता है। अल्लाह के रसूल सललल्लाहु अलैहि वसल्लम बही खाओ कि दल के दौरे को दूर करता है.अल्लाह ने ऐसा कोई नबी नहीं मामूर फ़रमाया जिसे जन्नत का बही ना खिलाया हो क्योंकि ये इंसान की ताक़त को चालीस अफ़राद के बराबर कर देता है।
अल्लाह के रसूल सललल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया अपनी हामिला औरतों को बही खिलाया करो क्योंकि ये दिल की बीमारीयों को ठीक करता है और लड़के को खूबसूरत बनाता है।तिब्बी एतबार से बही में बेशुमार खूबियां पाई जाती हैं मिसाल के तौर पर बही दिल के लिए बहुत मुफ़ीद है।मुँह से ख़ून आने के आरिज़े में मुफ़ीद है।

अगर हमल के दौरान खाया जाये तो हमल के गिरने से काफ़ी हद तक महफ़ूज़ रहा जा सकता है।बही के इस्तिमाल से पेशाब खुल कर आता है।जिगर के बीमारी में मुफ़ीद है।गर्मी के बाइस होने वाले सिरदर्द को दूर करने का एक क़ुदरती ग़िज़ाई टॉनिक है।गर्मी के बाइस होने वाले नज़ला और खांसी के लिए मुफ़ीद है।
दमा के लिए शिफ़ा-ए-बख़श दवा साबित होती है।दिल और दिमाग़ की गर्मी को ठीक करती है।बलग़म और सीने की ख़रख़राहट को नफ़ा पहुँचाता है।
ख़ुशक खांसी के लिए मुफ़ीद है।मसाना और जिगर की गर्मी को दूर करता है।दिमाग़ को फ़र्हत बख़शतता है।

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