Women Achiever’s Series: महिला सशक्तिकरण और हिंसा के खिलाफ आवाज़ उठाती मानसी प्रधान

December 29, 2017 by No Comments

मानसी प्रधान, एक ऐसा नाम हैं, जिन्होंने बचपन से अपने अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ी है। ओड़िशा के खुर्धा जिले में अयातापुर नामक एक बहुत ही दूरदराज के गांव से आने वाली, मानसी प्रधान का सफर पहाड़ जैसी बाधाओं और उन्हें पार करने के लिए किए जा रहे संघर्ष की एक बहुत ही रोमांच भरी कहानी है।
मानसी का जन्म 4 अक्टूबर 1962 को ओडिशा के अयातापुर नामक गाँव में हुआ। उनके माता-पिता हेमलता प्रधान और गोदाबरिश प्रधान के सब बच्चो में वह सबसे बड़ी थी। मानसी के पिता एक किसान थे और माता ग्रहणी थी।
भारत जैसे देश में जहाँ महिलाओं के पास मौलिक अधिकार होते हुए भी उन्हें दबाया जाता है। मानसी भी एक ऐसे ही माहौल में पली-बड़ी हैं। जहाँ पर लड़कियों के शिक्षा पर ज्यादा जोर नहीं दिया जाता।
मानसी भी एक ऐसे गाँव में पैदा हुई थी, जहाँ लड़कियों को मिडिल स्कूल खत्म करने के बाद उनकी पढाई रुकवा दी जाती थी। क्यूंकि लड़कियों को आगे की पढ़ाई करने के लिए गाँव से बाहर हाई स्कूल में जाना पड़ता था।
जिसके चलते अक्सर रूरल इलाकों में लड़कियों की पढ़ाई छुड़वा कर उन्हें घर के कामकाज में लगा दिया जाता है और उसके बाद उनकी शादी करवा दी जाती है।
लेकिन मानसी अपने गाँव की लड़कियों के लिए वो मिसाल बनी, जो पहाड़ी इलाके और दलदलों के बीच, 15 किलोमीटर से अधिक की पैदल चलती है। क्यूंकि उस वक़्त उस इलाके में एक ही हाई स्कूल था। मानसी गाँव और पहली की महिला बनी जिसने मैट्रिक्यूलेशन पास की।
हाई स्कूल पास करने के बाद परिवार के पास बेटी को आगे की पढ़ाई कॉलेज में करवाने के लिए संसाधनों और पैसों की कमी थी।

अपने सपनों के साथ मानसी ओडिशा के पुरी, जोकि उनके गाँव से 200 किमी दूर है, वहां अपनी खाली जेब में कई ख्वाइशें लेकर पहुंची।उनकी पढाई का खर्चा परिवार द्वारा उठाया नहीं जा रहा था। लेकिन पढ़ाई के दौरान परिवार की जिम्मेदारी भी मानसी के कंधों पर आ गई।इंटरमीडिएट परीक्षा पास करने के तुरंत बाद मानसी को अपने परिवार की मदद और अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए नौकरी करनी पड़ी।

उन्होंने पुरी के सरकारी कॉलेज में इकोनॉमिक्स में बीए की। उत्कल यूनिवर्सिटी से ओडिया साहित्य में एमए की। इसके साथ उन्होंने जी एम लॉ कॉलेज से लॉ में स्नातक डिग्री ली। इस सफर में मानसी ने कठिनाईओ का सामना बहुत ही बहादुरी से किया। उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए और अपने परिवार की मदद करने के लिए पूरे दिन में अथक काम कर अपनी बाधाओं को पार किया, बल्कि वह अपने समय के सबसे बड़े छात्र नेता के रूप में भी उभरी।

ओडिशा में साल 1980 छात्र आंदोलन में उन्होंने संयोजक के रूप में नेतृत्व किया। मानसी ने ओडिशा सरकार के वित्त विभाग और आंध्रा बैंक में कुछ वक़्त के लिए नौकरी की। लेकिन मानसी के सपने इससे बड़े थे। जिन्हे पूरा करने के लिए मानसी ने नौकरी छोड़ दी और अपने जूनून को पूरा करने के लिए उन्होंने 21 साल की उम्र में अक्टूबर 1983 में, अपना प्रिंटिंग बिज़नेस और एक साहित्यिक पत्रिका शुरू की।

मानसी की मेहनत जल्द ही रंग लाई और कुछ ही सालों में, उनका बिज़नेस तेजी से बढ़ता जा रहा था। उसे अपने समय के कुछ सफल महिला उद्यमियों की लीग में डाल दिया। जिसके बाद मानसी का नाम सफल महिला उद्यमियों में शुमार हो गया। मानसी एक कवि, लेखक और सामजिक कार्यकर्ता के रूप में भी उभरी।

उन्होंने काफी किताबे लिखी, जिन्हे इंटरनेशनल लेवल पर पहचान मिली। खुद की सशक्त पहचान बनाने के साथ मानसी ने महिला सशक्तिकरण के लिए भी काम किया। मानसी ने हजारों महिलाओं को प्रेरित करने और सशक्त बनाने के लिए, एक एनजीओ खोला जो शायद ही कभी अपने खुद के सपने को आगे बढ़ाने के लिए साहस दिखा पाती।
साल 1987 में, उन्होंने OYSS Women की स्थापना की। जिसका प्रारंभिक उद्देश्य महिलाओं की उच्च शिक्षा देना था, जिससे वह समाज में एक लीडर के रूप उभारने का था। इस संस्था ने महिलाओं को शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण शिविर, कानूनी जागरूकता और आत्मरक्षा शिविर लगाकर पोषित किया।

साल 2009 में, उन्होंने भारत में महिलाओं के खिलाफ हो रही हिंसा को खत्म करने के लिए नेशनल कैंपेन चलाया। जिसका उद्देश्य महिलाओं को उनपर होने वाले अत्याचारों के खिलाफ आवाज़ उठाने के लिए जागरूक करना था।
उन्होंने रणनीति के तहत महिलाओं पर अत्याचारों से लड़ने के लिए कानूनी और संस्थागत प्रावधानों पर जागरूकता बढ़ाने के लिए women’s rights stall, women’s rights festival, women’s rights meets, women’s rights literature, audio-visual displays, street plays का आयोजन किया।

महिलाओं के अत्याचारों का विरोध करने के साथ उन्होंने शराब-विरोधी आंदोलन का भी नेतृत्व किया। इस आंदोलन ने हाल ही में “निर्भया वाहिनी” का गठन किया है। जिसमें 10,000 से अधिक स्वयंसेवक कार्यरत हैं। ये आंदोलन महिलाओं के खिलाफ हिंसा से निपटने के लिए सभी राज्य सरकारों के समक्ष इससे जुड़े कानून में सुधार करने के लिए Four-Point Charter of Demand को लागू करने के लिए चलाया गया है।
जिसमें शामिल हैं:

शराब व्यापार को रोकना।
शैक्षिक पाठ्यक्रम के तहत महिलाओं के लिए सेल्फ डिफेंस प्रोग्राम।
प्रत्येक जिले में महिलाओं की सुरक्षा के लिए विशेष सुरक्षा बल।
हर जिले में विशेष जांच एवं अभियोजन पक्ष फास्ट-ट्रैक कोर्ट।

मानसी प्रधान एक भारतीय महिला कार्यकर्ता और लेखक हैं, जिन्होंने 2013 में राणी लक्ष्मीबाई स्त्री शक्ति पुरस्कार हासिल किया। इसके साथ उन्होंने साल 2011 में मिशनरी ऑफ चैरिटी के वैश्विक प्रमुख मैरी प्रेमा पैरिक के साथ, ‘Oustanding female Award’ जीता।

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