Women Achiever’s Series: इंडियन एयरफोर्स में सोलो उड़ान भरने वाली पहली महिला पायलट थी हरिता कौर देओल..

सपनों को पंख लग जाएँ तो जिंदगी की उड़ान भरना बहुत दिलचस्प हो जाता है। हर इंसान अपने सपनों को पूरा करने के लिए मेहनत करता है और जब आप अपने सपनों को पूरा कर आसमान में उड़ान भरते हैं। वो मौका आपको मिल जाएँ तो ये बहुत गर्व भरा पल होता है।
आज बात करते हैं उस महिला पायलट की। जिन्होंने इंडियन एयरफोर्स में अकेले उड़ान भरी थी।
इनका नाम है स्व. फ्लाइट लेफ्टिनेंट हरिता कौर देओल। इनका जन्म साल 1972 में पंजाब के चंडीगढ़ में एक सिक्ख परिवार में हुआ था। वह शॉर्ट सर्विस कमिशन (एसएससी) के अधिकारियों के रूप में वायु सेना में शामिल होने वाली पहली सात महिला कैडेटों में से एक थीं। देओल ने भारत में महिलाओं को ट्रांसपोर्ट पायलट के रूप में एक महत्वपूर्ण चरण के रूप में चिह्नित किया।

एयरफोर्स एकेडेमी हैदराबाद से प्रारंभिक प्रशिक्षण के बाद उन्होंने येलहांका एयरफोर्स स्टेशन में एयर लिफ्ट फोर्स प्रशिक्षण प्रतिष्ठान (एएलएफटीई) में और ट्रेनिंग हासिल की। साल 1992 में उन्होंने एयरफोर्स ज्वाइन की। देओल ने 2 सितंबर 1994 को एक एविरो एचएस -748 में अपनी पहली उड़ान थी, तब वह 22 साल की थी। उन्होंने बहुत ही छोटी उम्र में सफलता हासिल कर खुद की एक अलग पहचान बनाई।

अपनी पहली उड़ान भरने के बाद 10 हजार फ़ीट की ऊंचाई पर आसमान में बादलों से लुक्का-छिप्पी खेल देश के लिए इतिहास रचा और औरतों के लिए अपने सपने पूरे करने का प्रेरणास्रोत बन गई। इस तरह उन्होंने इस पुरष प्रधान समाज में ये साबित किया कि महिलाएं भी पूर्ण रूप उनका मुकाबला कर सकती हैं। वह भी उनकी तरह हर काम में सक्षम और साहसी हैं।

आसमान में ये पहले ऐतिहासिक पल के बाद जब वह जमीन पर उत्तरी तो उन्हें एयरफोर्स की ओर से उन्हें काफी प्रशंसा और बधाई मिली। आकस्मिक होने के नाते, वह अपनी उपलब्धि से कभी भी अभिभूत नहीं हुई थी। उनका कहना था, मैं खुश हूं कि मैं सोलो उड़ान भरने वाली मैं पहली महिला पायलट बानी हूं और अपने कोच की उम्मीदों पर खरी उतर पाई हूँ।

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