Women Achiever’s Series: ये हैं भारत की पहली महिला जासूस, पढ़े कैसा रहा इनका डिटेक्टिव बनने का सफर

November 25, 2017 by No Comments

डिटेक्टिव, एक ऐसा प्रोफेशन है, जिसे फिल्मों में तो अक्सर देखते हैं और पसंद करते हैं। लेकिन क्या असल जिंदगी में हम डिटेक्टिव से कंसल्ट करना चाहते हैं। क्यूंकि डिटेक्टिव की जरूरत, मतलब हमारी पर्सनल या प्रोफेशनल ज़िन्दगी में कुछ गड़बड़ है। फिल्मों में भी इस प्रोफेशन में ज्यादातर हमने पुरषों को ही काम करते देखा है। लेकिन क्या आप जानते हैं की भारत की पहली प्राइवेट महिला डिटेक्टिव कौन है ?

इनका नाम है रजनी पंडित। रजनी पंडित ने भारत में पहली डिटेक्टिव सर्विसेज कंपनी खोली, जोकि एक महिला द्वारा शुरू की गई और अबतक चल रही है। रजनी पंडित का जन्म महाराष्ट्र के ठाणे जिले के पालघर में हुआ था। उनके पिता, शांताराम पंडित, मुंबई पुलिस के साथ एक आपराधिक जांचकर्ता थे।रजनी ने मुंबई में रुपरेल कॉलेज में मराठी साहित्य की पढ़ाई की है। यहीं पर उन्हें पहली बार जासूसी के काम में इंटरेस्ट जागा।
रजनी ने साल 1983 में अपना पहला केस सुलझाया था। ये केस उनकी क्लासमेट का ही था, जोकि वेश्यावृत्ति में शामिल थी। रजनी को अबतक 57 पुरस्कार मिल चुके हैं। रजनी ने नेशनल और इंटरनेशनल लेवल पर 75,000 से ज्यादा मामले हल किए हैं। उनका कहना है कि कोई भी जासूस पैदा होने से ही होता है और मेरे केस में यह प्रूव भी हुआ है। इंटेलिजेंस आपको किसी टीचर से नहीं बल्कि आपकी जिंदगी सिखाती है।

पंडित का कहना है कि जब उसने कॉलेज में अपना पहला “मामला” हल किया था, तब उस के परिवार ने उन्हें जासूसी के प्रोफेशन ने जाने के लिए काफी प्रोत्साहित किया था। दरअसल जासूस बनने के लिए उसकी पढाई की जरूरत नहीं होती, इस प्रोफेशन में एकाग्रता, कड़ी मेहनत, संघर्ष, गहराई से ज्ञान और समर्पण की जरुरत होती है।

इसके बाद रजनी पंडित ने साल 1991 में अपनी कंपनी रजनी पंडित डिटेक्टिव सर्विसेज को शुरू किया। साल 2010 तक, उनकी कंपनी ने 30 जासूस कर्मचारियों को नियुक्त किया और एक महीने में करीब 20 मामलों को हल कर देते हैं।
इस प्रोफेशन में आने के चलते रजनी को काफी दिक्क्तों का सामना करना पड़ा। उन्होंने बताया कि मैं भारत की पहली महिला हूँ जो इस क्षेत्र में काम कर रही है। लोग हमेशा मुझे ताने देते थे,उनका मानना था कि मुझे और कोई काम नहीं मिलता इसलिए मैंने ये इस काम को अपना प्रोफेशन बनाया है।

लोग कहते थे कि काम महिला के लिए नहीं है। लेकिन लोगों की बातों पर ध्यान न देकर उन्होंने ये राह पर चलना जारी रखा। अपनी मेहनत और लगन के बलबूते पर वो एक सफल जासूस बनी और आज उनके क्लाइंट्स सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि विदेश में भी है।
साल 1998 के एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी ने देश और विदेशों में “घरेलू समस्याएं, कंपनी जासूसी, लापता लोगों और हत्याओं” के मामलों पर काम किया है।

इस दौरान उन्होंने कभी एक नौकरानी, एक अंधी महिला, गर्भवती महिला, मूक स्त्री के भेष में काम किया। डर नाम का मेरी डिक्शनरी में कोई शब्द नहीं है। रजनी ने दो किताबें भी लिखी है: “Face Behind Face” और “Mayajal” इसके साथ डायरेक्टर दिनकर राव ने उनपर एक लेडी जेम्स बांड नाम पर एक डॉक्यूमेंट्री भी बनाई।

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