अपने लिए लड़ना न छोड़े महिलाएं, समाज में हिंसा और जेंडर इनक्विलिटी के खिलाफ हार न मानें..

January 11, 2018 by No Comments

हम सब ना तो अपने आप को जानते है और ना ही जानना चाहते है. क्यों? ऐसा क्यों है?क्यों लोग अपने आप को सब से ज़्यादा समय देकर भी अपने आप को नही समझ पाते है और सवाल रहा लड़का अच्छा या लड़की ? ये तो बहुत दूर की बात है।

क्योंकि लोग अपने आप को अपने लिंग को सब से अच्छा बताने से पीछे नही होते। पता है आप सबको जब कोई लड़की-लड़की बात करती है तो बोलती है लड़को को कोई परेशानी नही है इस समाज में, हम सब को कितनी परेशानी होती है,पहले तो जन्म नही लेने देते है, फिर पढ़ने नही देते है, पढ़ने देते हैं तो पढ़ते-पढ़ते ही शादी का बोझ लाद देते है और पता नही क्या क्या चलो ये तो रही लड़की की बात और अब आते है ।

लड़को पर उनपर तो बहुत बोझ है पर तो भी एक लड़का दूसरे कोई भले ही भाई भाई बोलता हो पर अपनी बहन को नही मिलवाना चाहता है अपने घर के अन्दर नही आने देना चाहता है पर अगर किसी लड़की ने उनके लिंग को कुछ बोल दिया तो सब लड़के अपनी लिंग की इज़्ज़त बचाने लग जाते है पर एक लड़की तो लड़ाई करेगी अपने लिगं के लिये एक समय तक फिर उसके बाद वो कुछ नही बोलेगी ओर हार मान लेगी ओर दूसरी लड़की उसका साथ नही देगी बल्कि उसे ही स्त्रीवाद टाइप बोल कर चुप करवा देगी।

पर कोई ये क्यों नही समझता है कि कोई लिंग किसी के लिंग से बड़ा या छोटा नही होता है ।दोनों का एक ही स्थान है समाज में ओर एक दूसरे के बिना अधूरे है। लोगो को पहले अपने आप को समझना चाहिये और जब कोई अपने आप को समझ जाएगा तो लिंग है भेद दूर हो जाएगा। तब जो समाज का निर्माण होगा उसकी कल्पना तो बहुत अनोखी है।

(ये आर्टिकल लखनऊ यूनिवर्सिटी की छात्रा रूचि यादव द्वारा लिखा गया है)

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