हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जब फजर की नमाज के लिए तशरीफ ले जाते हैं तो वह रास्ते में यह दुआ मांगते हैं

December 3, 2018 by No Comments

दोस्तों अस्सलाम वालेकुम रहमतुल्लाह व बरकातहू दोस्तों हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जब फजर की नमाज के लिए तशरीफ ले जाते हैं तो वह रास्ते में यह दुआ मांगते हैं (अल्लाहु मझ अल फी कालबी नूरा वा फि बासरी नूरा वा फि समरी नूरा वा अन्या लीमी नुरा वा एन शिमली नूरा वा मिन अल्फी नूरा वा मिन अमामी नूरा वा बिन बाश्री नूरा) आय अल्लाह मुझे नूर ही नूर दे दोस्तों में पीर जुल्फिकार अहमद साहब अपनी तकदीर में कहते हैं कि दोस्तों यह कितनी अहम बात है और हम में से कितने लोग इस दुआ को रोज पढ़ते हैं रुस्तम बहुत ही कम लोग होंगे जो बाकायदा इस दुआ को पढ़ते होंगे दोस्तों अल्लाह के हबीब सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हमारे लिए यह दुआ सिखाई है.

दोस्तों दिनों के दिन गुजर जाते हैं महीनों के महीने गुजर जाते हैं लेकिन यह दुआ हमारी जुबान पर नहीं आती है और अल्लाह के हबीब सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम दुआ मांग रहे हैं कि अल्लाह मुझे ही नूर बना दे दोस्तों पीर जुल्फिकार साहब का कहना है कि आज वक्त है इस नूर को हासिल करने का अगर दुनिया में इस नूर को हासिल नहीं किया तो कल कयामत के दिन परेशानी होगी.

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दोस्तों इसलिए जो नेक काम करता है सुन्नत और शरीयत पर अमल करता है और अल्लाह ताला का कुरब हासिल करता है और अल्लाह ने कुरान में फरमाया कि वह जो मुर्दा था हमने उसको जिंदा किया और उसको हमने नूर अता किया और उसी नूर को लेकर वह इंसानों में चलता है तो दोस्तों इस नूर को दिल में लेना हमारे लिए बहुत जरूरी है और यह नूर सिर्फ और सिर्फ दुनिया में ही मिलेगा.

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इसके अलावा कोई और जिंदगी में यह नूर नहीं मिलेगा दोस्तों अल्लाह बाग में हमें दुनिया में एक मकसद देकर भेजा है और वह मकसद यह है कि मरने से पहले मरने की तैयारी करना है और जन्नत में जगह बनाना है इसीलिए अल्लाह ने हमें दुनिया में भेजा और यह हमारा इम्तिहान है लेकिन दुनिया में आकर हम अपने मकसद को भूल गए और दूसरी चीजों में लग गए।।

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