ये है यूपी की मुस्लिम राजनीति का सबसे मजबूत किला, इतनी बार जीते मुस्लिम उम्मीदवार

February 4, 2019 by No Comments

दोस्तों आज हम आपको यूपी की एक ऐसी लोकसभा सीट के बारे मे बताने जा रहें हैं जिसपर एक लंबे समय से मुसलमान प्रत्याशीयो का दबदबा बना है और उस क्षेत्र में मुस्लिम प्रत्याशीयो का राज चलता आया है. दोस्तों हम बात कर रहे हैं उत्तर प्रदेश की रामपुर लोकसभा सीट के बारे में रामपुर को एक बड़े मुस्लिम नेता का गढ़ भी माना जाता है.
उत्तर प्रदेश के रामपुर लोकसभा सीट में कुल पांच क्षेत्र आते हैं उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से एक रामपुर लोकसभा सीट को आजम खान का गढ़ माना जाता है. पिछले चुनाव में यहां पर बीजेपी के नेपाल सिंह ने जीत हासिल की थी जबकि सपा के नसीर अहमद खान ने नेपाल सिंह को कड़ी टक्कर दी थी और कांग्रेस के नवाब काजिम अली खान तीसरे नंबर पर थे.

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इन तीनों के वोट में कुछ ही अंकों का फर्क था ।तीनों में कड़ी टक्कर हुई लेकिन मुस्लिम वोटों के बट जाने के कारण बीजेपी के प्रत्याशी नेपाल सिंह को कामयाबी मिली ।यदि मुस्लिम वोटरों ने किसी एक को वोट दिया होता तो नेपाल सिंह दूर-दूर तक जीत नहीं सकते थे। यह पहली बार नहीं था जब मुस्लिम प्रत्याशियों को इतने सारे वोट मिले ।अगर बात पिछले कई चुनावों की करें तो इस सीट पर अधिकतर मुस्लिम प्रत्याशियों ने राज किया है.
देश के पहले शिक्षा मंत्री डॉ अबुल कलाम आजाद भी यहां के सांसद रह चुके हैं, मुख्तार अंसारी नकवी भी यहीं से जीते थे. दोस्तों रामपुर को आज भी आजम खान का घर कहा जाता है और अब्दुल कलाम ने तो अपने पहले चुनाव में रामपुर को अपनी कर्मभूमि ही चुन लिया था। आजम खान ने जयाप्रदा को भी यहीं से टिकट दिलाया था लेकिन बाद में आजम खान और जयाप्रदा के बीच में होने वाली अनबन के कारण 2014 में आजम खान ने यह टिकट नसीर अहमद को दिलवा दिया, आजम खान की राजनीति में काफी गहराई तक पकड़ है.

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दोस्तों ऐसे तो रामपुर में सपा की पकड़ काफी मजबूत है, हो सकता है कि इसका फायदा महागठबंधन को मिले क्योंकि रामपुर में इस वक्त माहौल के हिसाब से भाजपा का असर सपा की तुलना में कम है. अगर महागठबंधन को रामपुर की सीट से जीत पाना है तो यहां पर किसी बड़े मुस्लिम नेता को प्रत्याशी बनाना चाहिए ।यह सवाल अलग है कि कांग्रेस और भाजपा किसे उतारते हैं यदि यहां पर वोटों का बंटवारा नहीं हुआ तो बेशक जीत किसी मुस्लिम प्रत्याशी की ही होगी क्योंकि पिछले चुनावों में से 11 चुनावों में यहां पर मुस्लिम प्रत्याशियों को जीत मिली है, अब यहां की सीट पाने के लिए पार्टियां क्या खेल खेलती हैं यह तो आने वाला समय ही बताएगा.

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