योगी की कार्यवाही के बाद सपा में घमासान, दो दिग्गज आपस में भिड़े

November 1, 2018 by No Comments

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि वे सुनिश्चित करें कि भविष्य में अवैध कॉलोनियों का निर्माण न हो। योगी ने विकास प्राधिकरणों तथा अवैध निर्माणकर्ताओं के बीच शमन की प्रक्रिया को तेज गति प्रदान करने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जिसके बाद प्रशासन हरकत में आ गया था और तमाम अवैध निर्माण को बुलडोजर से गिराए जाने का आदेश जारी हुआ था।

इसी कड़ी में बदायूं में सोत नदी के किनारे बना सपा के पूर्व विधायक और दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री आबिद रजा के मैरिज हॉल को प्रशासन ने जमींदोंज कर दिया है। यह मैरिज हॉल सपा सरकार के दौरान बनी थी। यह हॉल इतना विस्तारित और मजबूत बना था कि प्रशासन को दिनभर कई बुल्डोजर चलवाने पड़े। आपको बता दे इस दौरान प्रशासन के अफसर और पुलिस, पीएसी के जवानों के साथ दिनभर घेराबंदी किए रही। इस बीच लोगों के मन में तरह-तरह की आशंकाएं भी रहीं। योगी सरकार के इस फ़ैसले के बाद कहा जा रहा है कि सपा सांसद धर्मेन्द्र यादव और आबिद रज़ा में मनमुटाव की स्थिति है. आबिद रज़ा के क़रीबी लोगों का मानना है कि अगर धर्मेन्द्र चाहते तो ऐसा न होता. आबिद रज़ा को आज़म ख़ान का क़रीबी माना जाता है.

दरअसल बदायूं शहर के पश्चिम में लालपुल के पास सोत नदी के किनारे पूर्व दर्जा राज्यमंत्री आबिद रजा का बारातघर बना था। यह बारातघर करीब ढाई साल पहले अखिलेश सरकार में बना था। आरोप है कि आबिद रजा ने सपा सरकार में एक अफसर पर दबाव बनाकर अपने तरीके से रिपोर्ट लगवा ली थी। मगर विनियमित विभाग से नक्शा पास नहीं हुआ। प्रदेश में योगी सरकार आने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया। आबिद रजा ने नक्शा पास कराने के लिए सिटी मजिस्ट्रेट के यहां आवेदन किया।

करीब एक साल पहले तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट राजकुमार द्विवेदी ने बारातघर सोत नदी की जमीन पर बाढ़ क्षेत्र में बना बताकर आवेदन खारिज कर दिया था। इसके बाद आबिद रजा ने डीएम के यहां अपील की। डीएम की अध्यक्षता वाली कंट्रोलिंग कमेटी ने मामले की सुनवाई के बाद 22 अक्तूबर को अपना फैसला सुनाते हुए आबिद रजा की अपील खारिज कर दी। सपा सरकार के समय में पूर्व विधायक ने सोत नदी पर अवैध रूप से मैरिज हॉल का निर्माण शुरू हुआ था । 2017 में बदायूँ विधानसभा चुनाव के दौरान बड़ा मुद्दा बना था। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में 6 जेसीबी मशीन अवैध निर्माण को तोड़ने में लगी रहीं।

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