योगी के मंत्री ने VIP होने का भरा दंभ, साफ़ करवाई सैंडिल

November 15, 2018 by No Comments

लखनऊ: एक तरफ तो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकारी गाड़ियों से लाल व नीली बत्ती हटाकर वीआईपी संस्कृति को समाप्त करने की बात करती है,  वहीं दूसरी तरफ उसके ही मंत्री अपने अर्दली से सैंडिल साफ कराकर अपने वीआईपी होने का दम्भ दिखा रहे हैं. दरअसल गुरुवार को कुशीनगर के बुद्ध पीजी कालेज के पौधरोपण कार्यक्रम में प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री व कुशीनगर के प्रभारी मंत्री राजेन्द्र प्रताप सिंह उर्फ मोती सिंह अतिथि के रूप में पहुंचे थे। इस दौरान उनके सैंडिल पर धूल व कुछ धब्बा लग गया तो उनके अर्दली ने लाल रुमाल से उसे साफ किया। मंत्री बड़े इत्मिनान से अर्दली व कार्यकर्ता से सैंडिल साफ कराते दिख रहे हैं। 

बता दे कि जब पत्रकारों ने मंत्री से अर्दली के द्वारा अपनी सैंडिल साफ कराने की बात पूछी गई तो वे पहले अटके और फ‍िर इस घटना से पूरी तरह अनजान बन गए। जब तक कि वे इसका जवाब देते कि मंत्री के साथ मौजूद कार्यक्रम आयोजक ने कहा कि, मंत्री ने रुमाल से स्वयं सैंडिल साफ की है, अर्दली या किसी कार्यकर्ता ने नहीं। इस पर मंत्री ने भी हामी भरी। लेकिन इस घटना के दौरान ली गयी तस्वीर कुछ और ही बयान कर रही है। इस मामले को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है।दरअसल योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह उर्फ मोती सिंह प्रतापगढ़ जिले की पट्टी विधानसभा क्षेत्र से विधायक है। मंत्री जी इसके पहले भी विवादों में घिरे रहे है। उन्होंने ने पहले एक विवादास्पद बयान दिया था जिसमे उन्होंने कहा था कि क्षेत्र का विकास न करने वाले भाजपा-अपना दल विधायकों और सांसदों के मुंह पर कालिख पोत देना चाहिए। फिलहाल मंत्री द्वारा कार्यकर्ता से सैंडल पहनने के मामले में उनका कोई बयान नहीं आया है।

राजनीति बिना शोहरत के नहीं चलती है और शोहरत बिना नाम और काम के नहीं मिलती है। सियासत के मैदान में वही नेता लम्ब समय तक टिका रहता है जिमसें धैर्य कूट−कूट कर भरा हो। अपमान का कड़वे से कड़वा घूंट पीने की क्षमता हो। यहां जनता की नब्ज को पकड़ कर चलना कामयाबी की कसौटी होती है तो समय की समझ सफलता का मापदंड होता है। इसीलिये राजनीति के मैदान में कूदने वाले तमाम नेता बहुत कुछ हासिल करने के बाद भी राजनैतिक शिखर पर नहीं पहुंच पाते हैं। यह वह नेता होता हैं जो राजनीति को शॉर्टकट से आगे बढ़ाने पर विश्वास रखते हैं और जब यह रास्ता चुनते हैं तो ऐसे नेताओं का विवादों से नाता जुड़ जाता है। बात उत्तर प्रदेश की कि जाये तो यहां तो ऐसे नेताओं की लम्बी चौड़ी फौज है जो अपने काम से अधिक कारनामों से जाने जाते हैं। इनके विवादित बोल, इनको सुर्खियां तो दिलाते हैं, लेकिन बहुत जल्दी ही ऐसे नेतागण राजनैतिक परिदृश्य से गायब भी हो जाते हैं।

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