लखनऊ: नेतान्याहू के भारत दौरे के विरोध में जुटे लोग, ‘फ़िलिस्तीनी मुद्दा इंसानियत का मुद्दा है’

January 16, 2018 by No Comments

इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू की भारत यात्रा के विरोध में गाँधी प्रतिमा, जीपीओ पर एक सभा का आयोजन किया गया. फ़िलिस्तीन के पक्ष में वैश्विक एकजुटता में अपनी भागीदारी करते हुए इज़राइल की दमनकारी,ज़ियोनवादी और साम्राज्यवादी नीतियों के खिलाफ़ सभा की गयी.

यूथ मैंडेट के सदस्य अरग़वान रब्बही ने कहा कि फ़िलिस्तीन का मुद्दा सिर्फ़ मुसलमानों का मुद्दा नहीं है, ये मुद्दा अरब से जुड़ा है जिसमें मुसलमान भी हैं और ईसाई भी और कुछ दूसरे धर्म के लोग और सबसे बड़ी बात ये है कि ये मुद्दा इंसानियत का मुद्दा है. उन्होंने कहा कि अगर ये ज़्यादतियाँ किसी और समाज के साथ होतीं तो भी हम इसी तरह यहाँ जमा होते. उन्होंने कहा,”भारत का पारंपरिक दोस्त रहा है और हमने लगातार फ़िलिस्तीन का समर्थन किया है, हाल में संयुक्त राष्ट्र में भी देश की मौजूदा सरकार ने अपनी ज़िम्मेदारी को समझा लेकिन अब बेंजामिन नेतान्याहू को बुलाना अफ़सोसनाक है.
लखनऊ विश्विद्यालय के छात्र वैभव मिश्रा ने इस बारे में कहा कि बेंजामिन नेतान्याहू एक सौदागर हैं और वो भारत में हथियारों का सौदा करने आये हैं जबकि उन्होंने भेष प्रधानमंत्री का लिया हुआ है. लखनऊ विश्विद्यालय के छात्र नवाज़ शरीफ़ ने कहा कि नेतान्याहू के हाथ फ़िलिस्तीनी बच्चों के ख़ून से सने हैं, जो काम हिटलर ने यहूदियों के साथ किया वही नेतान्याहू फ़िलिस्तीनी लोगों के साथ कर रहे हैं.अमीक़ जामेई ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि जो पैसा इज़राइल भारत से लेकर जाने वाले है वो पैसा बम की शक्ल में गाज़ा के मासूमों पर गिरेगा. के.के.शुक्ला ने कहा कि फ़िलिस्तीन का मुद्दा मुसलमानों का मुद्दा नहीं बल्कि इंसानियत का मुद्दा है.

स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ़ इंडिया के प्रवीण पांडे ने इज़राइल के प्रधानमंत्री की भारत यात्रा पर कहा कि नेतान्याहू साम्राज्यवादी देशों का प्रतिनिधि है और ऐसे देश के मुखिया का स्वागत करना या ऐसे देश के साथ किसी भी तरह का कूटनीतिक सम्बन्ध होना भारत जैसे देश के लिए निंदनीय है. उन्होंने कहा कि भारत ने लगातार साम्राज्यवाद से लड़ाई लड़ी है.समाजसेवी शाह मुहम्मद अफ़ज़ल ने कहा कि जिसके हाथ ख़ून से सने हैं, जिसके दामन में मासूम बच्चों के ख़ून की छीटें,औरतों की चीख़ती आवाज़ें…. जो सड़को पे बहता हुआ मज़लूमो के ख़ून का ज़िम्मेदार हो..वो हिन्दुस्तान की पाक सरज़मींन पे अपना क़दम रखे ये मुझे बर्दाश्त नहीं, मैं इसकी दिल की गहराइयों से मुख़ालिफत करता हूँ. अफ़ज़ल ने कहा कि वो इसकी पुरज़ोर निंदा करते हैं.

स्वतंत्र युवाओं द्वारा कराये गए इस प्रोग्राम को यूथ मैंडेट, स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ़ इंडिया, AIDSO,तथा अन्य संघठनों का समर्थन प्राप्त हुआ. इसके अलावा किसान मज़दूर संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष शिवाजी राय, के.के.शुक्ला, समाजसेवी हुस्ना आरा,मुहम्मद वलीउल्लाह, वरिष्ट पत्रकार संतोष सिंह, प्रशांत मिश्रा, वीरेन्द्र त्रिपाठी, ज्योति राय,डॉ नसीम ख़ान,मुहम्मद आबशारुद्दीन, डॉ नसीम ख़ान तथा अन्य ने लोगों ने कार्यक्रम में भाग लिया.

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