ज़िन्दगी में दुःख क्यूँ मिलता है? हजरत अली(र.अ.) ने दिया ये जवाब…

दोस्तों अस्सलाम वालेकुम रहमतुल्लाह व बरकातहू दोस्तों हजरत अली की शख्सियत से कौन नहीं है आज भी उनकी और उनकी बातों के जरिए से लोग फ़ैज़ ए आब हो रहे हैं और उनकी बहादुरी के किस्से भी हम अक्सर सुना करते हैं दोस्तों आज हम आपको एक किस्सा सुनाने जा रहे हैं जिस में एक शख्स हजरत अली रजि अल्लाह ताला अनु के दरबार में हाजिर हुआ और पूछा की जो अल्लाह ताला हम से 70 माह से ज्यादा मोहब्बत करता है तो हमें दुख ओर परेशानी कैसे दे सकता है.
आइए आपको बताते हैं इसके जवाब में हजरत अली रजि अल्लाह ताला अनु ने क्या कहा दोस्तों रसूले अकरम सल्लल्लाहो वाले वसल्लम की एक हदीस है जिसमें उन्होंने फरमाया कि मैं इल्म का शहर हूं और अली उसका दरवाजा है मतलब वाहा पर भी ये तय कर दिया गया कि जिस शख्स को भी इल्म चाहिए उसको इस दरवाजे पर आना पड़ेगा और सदा बुलंद करनी होगी.

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दोस्तों सहाबा इकराम रजि अल्लाह ताला अनु रसूल अल्लाह सल्लल्लाहू अलैही वसल्लम की इस बात को बखूबी समझते थे दोस्तों सहाबा ने इस पर अमल भी किया और चुनांचे हम देखते हैं कि रोज मनोर कोई ना कोई सहाबी हजरत अली के दरबार में आता और अपने परेशानी को डिसकस करता और एक मजबूत जवाब लेकर जाता.
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दोस्तों ऐसे ही एक बार हजरत अली अपना दरबार सजाए बैठे थे कि एक शक्स हाजिर हुआ और पूछो या अली जब अल्लाह ताला हम बदों से ७० मां से ज्यादा मोहब्बत करता है तो हमें वह परेशानी में कैसे डाल सकता है इमाम ए अली मुस्कुराए और बोले कि शख्स शुक्र अदा करो की अल्लाह ने तुम्हें पैदा किया और ईमान की दौलत से नवाजा और अल्लाह ने तुम्हे दुख दिया.
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वो भी एक नेमत है वो शक़्स ने कहा आए अली दुख भी एक नेमत है ये इस तरह से नेमत है कि जब अल्लाह किसी शकास को मजबूत मानना चहेता है तो वो उसे दुख देता है और जिस शक्स् को करीब करना चहेता है उसके उपर परेशान रंज और गम भेजता है क्युकी वी शक्स अपने खुशहाली के दिनों में अल्लाह से दूर हो जाता है इसलिए अल्लाह उसको अपने से करीब के लेता है.

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